श्री श्री रविशंकर जी का जन्मदिवस
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी का जन्मदिवस श्री श्री रवि शंकर जी अध्यात्म की दुनियां का बहुत बड़ा नाम है। भारत की मिट्टी से कईं महापुरुषों का अवतरण हुआ है जिसमें से श्री रविशंकर जी का नाम भी शामिल है। वे एक आधुनिक अध्यात्म गुरु तो हैं हीं, लेकिन उनके कामों के लिए उन्हें एक शांति राजदूत, मानववादी गुरु के रुप में जाना जाता है। आज के आर्टिकल में हम रविशंकर जी के और उनके कार्यों के बारे में जानेंगे। इस लेख में हम श्री श्री रवि शंकर जी के जीवन पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैं। रविशंकर जी का प्रारंभिक जीवन 13 मई 1956 के दिन दक्षिण भारत के तमिलनाडु में श्री श्री रविशंकर जी का जन्म हुआ। इनके पिता का नाम श्री वेंकट रत्नम् और माता का नाम विशालाक्षी था। इनके पिताजी ने आदि शंकराचार्य जी से प्रेरित होकर इनका नाम रविशंकर रखा। रविशंकर जी की प्रतिभा भी बचपन में ही दिखने लगी। बचपन से ही इनका झुकाव अध्यात्म के प्रति था। मात्र 4 वर्ष की आयु में ही वे भागवत गीता का संस्कृत में व्याख्यान किया करते थे। इतना ही नहीं रविशंकर जी…
Read moreचर्चा मदर्स डे से जुड़ी बातों पर
मां बहुत ही संक्षिप्त लेकीन विस्तृत शब्द है, जिसमें श्रृष्टि के सृजन से लेकर उसमें पल रहे जीवन पोषण का निहित है। मां की उपाधि एक महिला को जीवन में ऐसे स्तर पर पहुंचा देता है, जहां से वो और सुदृढ़, मजबूत और ज्यादा प्रेममय हो जाती हैं। हम सभी के जीवन में मां का बहुत महत्त्व होता है, आइए जानते हैं, मदर्स डे को मानने के पीछे का इतिहास और इसके पीछे की कहानी जानते हैं…… मदर्स डे 2024 मदर्स डे किसी एक तारीख को नहीं मनाया जाता है, क्योंकि इसके लिए कोई एक तारीख निश्चित नहीं होती। यह मई महीने के दुसरे सप्ताह में पड़ने वाले रविवार को मनाया जाता है। इस साल 2024 में मदर्स डे 12 मई को मनाया जाएगा। मदर्स डे को मातृत्व दिवस, मदरिंग दे के नाम से भी जाना जाता है। मातृत्व दिवस को भारत समेत कईं देशों में मनाया जाता है और क्योंकि यह रविवार को मनाया जाने वाला दिवस है, इसलिए इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी होता है। हालांकि कई देशों में 8 मार्च यानी की वूमेंस डे को ही मदर्स डे के तौर पर मनाया जाता है। मदर्स डे…
Read moreरेड क्रास डे का क्या महत्व है
रेड क्रास डे का महत्व आज के आर्टिकल में हम रेड क्रास डे के बारे में बात करने जा रहे हैं। जहां हम रेड क्रॉस का इतिहास, और इसके महत्व के बारे में जानेंगे। रेड क्रॉस सोसाइटी की शाखाएं विश्वभर के 180 से भी देशों में फैली हुई हैं जो महामारी या किसी भी प्राकृतिक आपदा जैसे मुश्किल और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की मदद करती हैं। चलिए जानते हैं रेड क्रॉस सोसाइटी के बारे में, कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्या है इसका इतिहास… रेड क्रॉस सोसाइटी क्या है रेड क्रॉस एक अंतराष्ट्रीय सोसाइटी हैं और इसके संस्थापक हेनरी ड्यूरेंट हैं। प्रथम विश्व युद्ध में हुए भयंकर नर संहार के बाद सन 1919 में रेड क्रॉस सोसाइटी या रेड क्रिसेंट सोसाइटी की स्थापना की गई। वर्तमान में रेड क्रॉस अंतर्राष्ट्रीय समिति की शाखाएं पूरी दुनियां में फैली हुई हैं। यह समिति निस्वार्थ भाव और बिना किसी पक्षपात के प्राकृतिक आपदा, ऐसी ही आपातकालीन परिस्थितियों में मानव जाति की सेवा करती है। सबसे पहला रेड क्रॉस डे साल 1919 में बनाया गया था। क्योंकि हेनरी ड्यूरेंट इस सोसाइटी की शुरुआत की थी इसलिए उनके जन्मदिवस यानी की 8 मई…
Read moreश्रमिक दिवस 2024 International Labour Day
श्रमिक दिवस 2024 International Labour Day मई दिवस, श्रमिक दिवस 1 मई 1889 का दिन, श्रमिक दिवस जिसे श्रम दिवस या कामगार दिवस के नाम से भी जाना जाता है का एक विस्तृत इतिहास है। श्रमिक दिवस (Labor Day 2024) को मनाने की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में की गई थी। इसके बाद दुनियाभर के देशों में श्रमिक दिवस को अलग-अलग दिन मनाए जाने की शुरुआत की गई। हर एक देश का मजदूर दिवस मनाने का अपना अलग तरीका है कईं देशों में तो इस दिन सरकारी अवकाश भी घोषित किए जाते हैं। अमेरिका, भारत, फ्रांस, जापान, चीन, जिम्बाब्वे और तंजानिया समेत कई देश मानते हैं, तो चलिए जानते हैं आखिर कैसे हुई मजदूर दिवस को मानने की शुरुआत और क्या है इसके पीछे की कहानी……. मजदुर दिवस की शुरुआत मज़दूरों के काम को पहचान देने, उन्हें उचित अधिकार देने और शोषण से बचाने के लिए की गई थी। इससे पहले मजदूरों को 15 घंटे काम करना पड़ता था जिसके विरोध में शिकागो के अंदर हजारों मजदूरों ने 1 मई 1886 को हड़ताल करते हुए दिन के आठ घंटे का कार्यदिवस मांगा। जिसके जवाब में मजदूरों की समस्याओं का…
Read moreबदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन व युवाओं की भूमिका
बदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन भारत में ट्रेड यूनियनो श्रमिक संघ को देश के मजदूरों, श्रमिकों के अधिकार की मांगो, उनकी आवाज को उठाने, उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए जाना जाता हैं । ट्रेड यूनियन भारत में श्रमिकों की आवाज को एक समूह में एकत्र कर उनके बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन की नीवं स्वतंत्रता से पूर्व रखी गयी थी। उस समय यह आंदोलन उन श्रमिकों पर केंद्रित था, जो मुख्यत उत्पादन के क्षेत्र में काम करते थे। इस आंदोलन के मुख्य उद्देश्यों में श्रमिकों की स्वतंत्रता, सुरक्षा, उनकी मज़दूरी में वृद्धि, उनके अन्य अधिकारों की रक्षा करना था। इस दौर में मजदूरों की स्थिति काफी कमजोर थी वहीँ कई बड़ी चुनौतियां भी सामने थी। हम इतिहास पर सीमित ना रहते हुए बदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन की भूमिका पर चर्चा करते हुए यही यह बात कहीं जाए कि बदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन की भूमिका पहले से अधिक सम्बद्ध हो चुकी है। कई बार यह आलोचना की जाती है की ट्रेड यूनियन का दौर बीत चुका हैं अब इनकी जरुरत नहीं , यह सोच पूंजीवादी सोच…
Read moreट्रेड यूनियन के विषय में गाँधी जी के विचार
ट्रेड यूनियन का विचार निश्चित रूप से यूरोप से आया, ऐसा इसलिए था क्योंकि यूरोप में सबसे पहले औद्योगिक क्रांति हुई थी, लेकिन गांधीजी ट्रेड यूनियन गतिविधियों को नैतिक आधार देने वाले पहले व्यक्ति थे, उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन का उद्देश्य सेवा करना होना चाहिए। श्रमिक वर्ग के लिए न्याय सुनिश्चित करना और उन्हें सच्चा नागरिक बनाना ट्रेड यूनियन का उद्देश्य होना चाहिए गांधीजी के लिए ट्रेड यूनियन गतिविधियाँ श्रमिकों के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास का एक और विचार था। :स्रोत इंटक 50 इयर्स महात्मा गांधी जी का श्रमिकों व् किसानों के उत्थान के लिए अविस्मरणीय योगदान रहा। गांधीजी के नेतृत्व में बिहार के चंपारण जिले में सन 1919 में एक बड़ा सत्याग्रह हुआ वहां पर नील की खेती करने वाले किसानों की स्थिति दयनीय थी। अंग्रेजों के राज में उनका शोषण हो रहा था इसके विरुद्ध उन्होंने सत्याग्रह किया। गांधी जी के विचार व सिद्धांत पूर्णतया अहिंसा पर आधारित थे। ट्रेड यूनियन एवं श्रमिकों के उत्थान के परिपेक्ष में भी उन्होंने राह दिखाई। समय बदला साथ-साथ ट्रेड यूनियन एवं उनके आंदोलन के स्वरूप में कई बार बदलाव आए परंतु उनके सिद्धांत आज भी हमें रास्ता दिखाते हैं…
Read moreट्रेड यूनियन एकीकरण की आवश्यकता
तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम कार्यकर्ताओं की बैठक श्रमिक संगठन इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ जी संजीव रेड्डी ने हैदराबाद स्थित सुंदरिया विज्ञान केंद्र में आयोजित तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम कार्यकर्ताओं की बैठक में संबोधित करते हुए कहां के हाल के वर्षों में भारत में ट्रेड यूनियन का एकीकरण श्रमिक आंदोलन पर परिदृस्य में एक महत्वपूर्ण विकास रहा है। परंपरागत रूप से भारत में बहुत सारी ट्रेड यूनियन रही हैं जो अक्सर वैचारिक या औद्योगिक आधार पर विभाजित होती हैं हालांकि एकता के कई कारणों से एकीकरण पर जोर दिया गया है। ट्रेड यूनियनों ने नियुक्ताओं और सरकार के सामने एक एकीकृत मोर्चा पेश करने के महत्व को तेजी से महसूस किया है। अपने प्रयासों को मजबूत करके उनका लक्ष्य कई छोटे और मध्यम आकार के ट्रेड यूनियन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों के अधिकारों और ही तो बेहतर रक्षा करना है, और एकीकरण श्रमिकों के बेहतर समन्वय और अधिक कुशल प्रतिनिधित्व की अनुमति देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनकी चिताओं को व्यापक रूप से संबोधित किया जाता है । जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक विचार के साथ अधिक एकीकृत होती…
Read moreबाबासाहेब का श्रमिकों से सरोकार
बाबासाहेब का श्रमिकों से सरोकार भारत रत्न बाबासाहेब, डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारतीय संविधान के निर्माता, दार्शनिक, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक, कुशल राजनीतिज्ञ एक महान व्यक्तित्व के महापुरुष थे। यदि हम उनकी महान जीवन यात्रा व कार्यों को अध्यन करें तो हम जान सकते है कि उनका पूरा जीवन शिक्षा के प्रसार और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित था। उनका जीवन दृढ़ विश्वास और उनका व्यक्तिगत साहस से भरा था। ” जीवन लंबा होने की बजाय महान होना चाहिए “ भारत के संविधान के रचियता बाबासाहेब का जीवन देश के लिए समर्पित रहा। अगर हम महिलाओ व श्रमिकों के अधिकारों , उत्थान लिए उनके योगदान की बात करें तो महिलाओं के अधिकार से लेकर श्रमिकों के उत्थान के लिए उनका गहरा सरोकार था। उन्होंने कहा, “मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूं.” । उन्होंने दहेज प्रथा की कुरीति और महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार के विषय को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया । “मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूं.” श्रमिकों के उत्थान की दिशा में उनका विशेष योगदान रहा।…
Read moreएनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लैंगिक सशक्तीकरण का जश्न मनाया
एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लैंगिक सशक्तीकरण का जश्न मनाया लैंगिक सशक्तीकरण का पक्षसमर्थन करने और अपने महिला कार्यबल के अमूल्य योगदान को मान्यता प्रदान करने के एक उत्साहपूर्ण प्रयास में, नवरत्न सीपीएसई एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक उत्सव समारोह का आयोजन किया। नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित यह कार्यक्रम लैंगिक विविधता को प्रोत्साहित करने और अपनी महिला कर्मचारियों के समर्पण का सम्मान करने के लिए आयोजन किया। समारोह का मुख्य आकर्षण उन महिला कर्मचारियों का अभिनंदन करना था जिन्होंने कंपनी को असाधारण 30 वर्षों तक सेवा प्रदान की है। एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री के. पी. महादेवास्वामी ने कंपनी के विकास और सफलता के प्रति उनकी सराहनीय प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हुए इन माननीय कार्मिकों को स्मृति चिह्न भेंट किए। आदरणीय अतिथिगणों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, श्री स्वामी ने लैंगिक समानता के लिए एनबीसीसी के अटल समर्थन को दोहराया और महिला कर्मचारियों के निरंतर योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक (वित्त) श्रीमती बी. के. सोखी की उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा में और वृद्धि हुई तथा उन्हें “एनबीसीसी…
Read moreउमंग उत्साह के साथ रंगो का पर्व होली
होली के रंग के साथ, होली का त्यौहार हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यह त्यौहार ढेर सारी खुशिया रंगो में समेटे हुए वसंत ऋतु के आने का सन्देश लिए आता है । एक और खास बात होली के पारंपरिक रीति-रिवाज , होली पर्व समाज में एकता, प्रेम, बंधुता का संदेश देता है। होली की मस्ती रंगों की बौछार नाचना गाना और गुंजियो के साथ खुशिया साँझा करना, लाल, हरा गुलाबी गुलाल लगाना यह इस त्यौहार में नया रंग भर देता हैं। संगीत की ताल पर नाचना गाना और होली के गाने ” रंग बरसे ” ” होली खेले ” इस त्यौहार में उत्साह के नए रंग भर देते हैं । होली के इस पावन अवसर पर गुलाल लगा कर एक-दूसरे के साथ बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं । रंगों की बौछार, गुंजिया , ठंडाई से इस त्यौहार का आनंद और ज्यादा बढ़ जाता हैं । बचपन की यादों के झरोखे से याद आता हैं पहले घर के बड़ो को टीका लगा कर पैर छू कर आशीर्वाद लेना उसके बाद घर से होली खेलने निकलना। माँ कहती थी पुराने कपडे पहनना रंगा लग कर खराब हो जाएँगे।…
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