होली के रंग के साथ, होली का त्यौहार हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यह त्यौहार ढेर सारी खुशिया रंगो में समेटे हुए वसंत ऋतु के आने का सन्देश लिए आता है । एक और खास बात होली के पारंपरिक रीति-रिवाज , होली पर्व समाज में एकता, प्रेम, बंधुता का संदेश देता है। होली की मस्ती रंगों की बौछार नाचना गाना और गुंजियो के साथ खुशिया साँझा करना, लाल, हरा गुलाबी गुलाल लगाना यह इस त्यौहार में नया रंग भर देता हैं। संगीत की ताल पर नाचना गाना और होली के गाने ” रंग बरसे ” ” होली खेले ” इस त्यौहार में उत्साह के नए रंग भर देते हैं ।

होली के इस पावन अवसर पर गुलाल लगा कर एक-दूसरे के साथ बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं । रंगों की बौछार, गुंजिया , ठंडाई से इस त्यौहार का आनंद और ज्यादा बढ़ जाता हैं ।
बचपन की यादों के झरोखे से याद आता हैं पहले घर के बड़ो को टीका लगा कर पैर छू कर आशीर्वाद लेना उसके बाद घर से होली खेलने निकलना। माँ कहती थी पुराने कपडे पहनना रंगा लग कर खराब हो जाएँगे। और पिता जी की कुछ हिदायत की ज्यादा शोर नहीं करना, पक्का रंग मत लगवाना, घर टाइम से लौट आना । कैसे दोस्तों की टोलिया टोपी पहने हाथ में गुलाल लिए एक दूसरे दोस्तों के घर जाना अंकल जी हैप्पी होली आंटी जी हैप्पी होली और मिठाई खाना और उसके बाद किसी दूसरे दोस्त के घर जाना । हाथो में पिचकारी और अपने साथी से पूछना कौन सा रंग हैं तुम्हारे पास ।हालाँकि अब वो दौर नजर नहीं आता पर समय के साथ सब कुछ बदलता हैं पर होली का उत्साह कम नहीं हुआ ।
एक और बात मुझे इस त्यौहार में लगती हैं की इस पर महंगाई का असर नहीं हुआ हैं । चन्दन का टीका या गुलाल के साथ बस चाहिए तो मन में उमंग, उत्साह।
तो मानते हैं नए उत्साह उमग के साथ होली।
लेखक वशिष्ट






