77th Foundation Day of INTUC Celebrated at New Delhi

77th Foundation Day of INTUC Celebrated at New Delhi The INTUC celebrated its 77th Foundation day on 3rd May all over India and the National Working Committee of INTUC was also held on the same day at New Delhi. On April 18, 1947, Shri Gulzarilal Nanda, Secretary of the Hindustan Mazdoor Sevak Sangh wrote to all nationalist minded trade union leaders in the country pointing out the pressure brought on the Sangh to initiate action for the formation of a new body which could voice the genuine demands of the working class for realizing their aspirations. The letter also proposed to hold a meeting on May 3 and 4, 1947 at New Delhi for a frank appraisal of the existing situation and for taking necessary steps to protect and promote the interests of both the workers and the country, which was on the threshold of achieving political freedom. The opening session was held at the Constitution Club at New Delhi on May 3, 1947. Sardar Vallabhbhai Patel presided. Acharya JB Kripalani, the then President of Indian National Congress inaugurated the Conference.National Leaders like Pandit Jawahar Lal Nehru, Shankar Rao…

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इंटक का स्थापना दिवस-एक नजर इंटक के इतिहास पर

इंटक का स्थापना दिवस- एक नजर इंटक के इतिहास पर केंद्रीय ट्रेड यूनियन इंटक की स्थापना 3 मई 1947 को हुई थीं , इंटक के कार्यकर्ता इंटक का स्थापना दिवस मना रहे हैं । नजर डालते हैं इंटक के इतिहास पर, क्या मुद्दे हैं क्या सफर रहा ट्रेड यूनियन संगठन इंटक का। इंटक की स्थापना – 3 मई 1947 वर्तमान अध्यक्ष – डा. जी संजीवा रेड्डी, पूर्व राज्य सभा सांसद मुख्यालय – नई दिल्ली कृपाशंकर वर्मा, इंटक के राष्ट्रीय सचिव का इंडियन वर्कर में लेख जो प्रकाश डालता हैं इंटक के इतिहास पर “हमें आवश्यकता थी एक ऐसे संगठन की जो यहां के श्रमिक वर्ग को सही दिशा दे और प्रयास करे जिससे सामाजिक न्याय, शांति एवं सुरक्षा की संभावना बनी रहे। उसकी कार्यप्रणाली और संविधान अनिवार्य रूप से प्रजातांत्रिक हो जिसमें उसके प्रत्येक घटक को खुली अभिव्यक्ति होगी। ऐसी स्थिति में अपने विचार और कार्यकलाप सही ढंग से करसकेंगे। ये शब्द थे भारत की एकता के निर्माता लौह पुरुष सरकार वल्लभ भाई पटेल के। ‘स्थापना के समय का घटनाक्रम’- यह विचार उन्हाेंने अपने अध्यक्षीय भाषण में उस अवसर पर रखे थे जिसमें राष्ट्रीय नेता, पंडित जवाहरलाल नेहरू, शंकर…

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श्रमिक दिवस 2024 International Labour Day

श्रमिक दिवस 2024 International Labour Day मई दिवस, श्रमिक दिवस 1 मई 1889 का दिन, श्रमिक दिवस जिसे श्रम दिवस या कामगार दिवस के नाम से भी जाना जाता है का एक विस्तृत इतिहास है। श्रमिक दिवस (Labor Day 2024) को मनाने की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में की गई थी। इसके बाद दुनियाभर के देशों में श्रमिक दिवस को अलग-अलग दिन मनाए जाने की शुरुआत की गई। हर एक देश का मजदूर दिवस मनाने का अपना अलग तरीका है कईं देशों में तो इस दिन सरकारी अवकाश भी घोषित किए जाते हैं। अमेरिका, भारत, फ्रांस, जापान, चीन, जिम्बाब्वे और तंजानिया समेत कई देश मानते हैं, तो चलिए जानते हैं आखिर कैसे हुई मजदूर दिवस को मानने की शुरुआत और क्या है इसके पीछे की कहानी……. मजदुर दिवस की शुरुआत मज़दूरों के काम को पहचान देने, उन्हें उचित अधिकार देने और शोषण से बचाने के लिए की गई थी। इससे पहले मजदूरों को 15 घंटे काम करना पड़ता था जिसके विरोध में शिकागो के अंदर हजारों मजदूरों ने 1 मई 1886 को हड़ताल करते हुए दिन के आठ घंटे का कार्यदिवस मांगा। जिसके जवाब में मजदूरों की समस्याओं का…

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ILO Reaches Agreement on the Issue of Living Wages

ILO Reaches Agreement on the Issue of Living Wages The International Labour Organization (ILO) has reached an agreement on the issue of the living wage. The agreement, reached during a Meeting of Experts on wage policies , in February, was endorsed by the ILO’s Governing Body at their session on Wednesday 13 March. The experts agreed that decent wages are central to economic and social development and to advance social justice. They also play an essential role in reducing poverty and inequality and ensuring a decent and dignified life. According to the experts, “the ILO denotes that the concept of a living wage is: -The wage level that is necessary to afford a decent standard of living for workers and their families, taking into account the country circumstances and calculated for the work performed during the normal hours of work; -Calculated in accordance with the ILO’s principles of estimating the living wage; -To be achieved through the wage-setting process in line with ILO principles on wage setting.” -The agreement says that the estimation of living wages should follow a number of principles, including the usage of evidence based methodologies and robust data, consultations with…

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बदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन व युवाओं की भूमिका

बदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन भारत में ट्रेड यूनियनो श्रमिक संघ  को  देश के मजदूरों, श्रमिकों के अधिकार की मांगो, उनकी आवाज को उठाने, उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए जाना जाता हैं । ट्रेड यूनियन  भारत में श्रमिकों की आवाज को एक समूह में एकत्र कर उनके बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन की नीवं स्वतंत्रता से पूर्व रखी गयी थी। उस समय यह आंदोलन उन श्रमिकों पर केंद्रित था, जो मुख्यत उत्पादन के क्षेत्र में काम करते थे।  इस आंदोलन के मुख्य उद्देश्यों में श्रमिकों की स्वतंत्रता, सुरक्षा, उनकी मज़दूरी में वृद्धि, उनके अन्य अधिकारों की रक्षा करना था। इस दौर में मजदूरों की स्थिति काफी कमजोर थी वहीँ कई बड़ी चुनौतियां भी सामने थी। हम इतिहास पर सीमित ना रहते हुए बदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन की भूमिका पर चर्चा करते हुए  यही  यह बात कहीं जाए कि बदलते  परिवेश में ट्रेड यूनियन की भूमिका पहले से अधिक सम्बद्ध  हो चुकी है। कई बार यह आलोचना की जाती है की ट्रेड यूनियन का दौर बीत चुका हैं अब इनकी जरुरत नहीं , यह सोच पूंजीवादी सोच…

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New Executive Committee of All India NTPC Workers Federation Formed

New Executive Committee of All India NTPC Workers Federation Formed Source The Indian Worker : The 6th All India NTPC Workers Federation (INTUC) Meeting was held at NTPC Mouda, Nagpur on 11th & 12th March, 2024. The new executive of INTUC affiliated All India NTPC Workers Federation was constituted. In which the responsibility of National President Babar Salim Pasa and National General Secretary was handed over to K P Chandravanshi. National INTUC President Dr G Sanjeeva Reddy will be the NTPC INTUC Federation Patron. In the sixth national convention and working committee meeting of All India NTPC Workers Federation, it was decided to find a solution to all the problems of the employees by discussing with the management by mid-April. Besides, proposals regarding furniture buyback, laptop, promotion policy, stagnation in SG grade and recruitment of new NTPC employees were also passed. Officials of INTUC Federation of more than 20 projects of NTPC participated in this meeting organized at NTPC’s Mauda Maharashtra. In the national convention, all the pending issues of the employees were discussed in depth and the resolution was passed. Mainly in this, at the time of recruitment…

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छत्तीसगढ़ प्रदेश इंटक कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न

श्रमिक हितों को बचाने के लिए प्रस्ताव पारित छत्तीसगढ़ प्रदेश इंटक कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न छत्तीसगढ़ प्रदेश इंटक की 44वीं कार्यकारिणी की बैठक गत 30 मार्च को एसएनजी विद्यापीठ सेक्टर 4, भिलाई में आयोजित हुई। इंटक के राष्ट्रीय महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश इंटक के अध्यक्ष डॉ संजय कुमार सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। स्वागत भाषण में स्टील ठेका श्रमिक यूनियन इंटक के अध्यक्ष संजय कुमार साहू ने बैठक के आयोजन के लिए स्टील ठेका श्रमिक यूनियन इंटक भिलाई का आभार व्यक्त किया। कार्यकारिणी की बैठक में श्रमिकों के हितों को बचाने के लिए उद्योगों में ठेका प्रथा को सरकार द्वारा बढ़ाने, नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं करने, आने वाले समय में ठेका श्रमिकों को संगठित कर उनको समान काम समान वेतन दिलाने, स्थाई प्रकृति के कार्य को लगातार ठेका श्रमिकों से करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जिसमें महानदी कोल फील्ड्स में ठेका श्रमिकों को नियमित किया गया है। इस प्रकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में स्थाई प्रकृति में कार्य करने वाले ठेका श्रमिकों नियमित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का संकल्प पारित किया गया । पेंशन को 9000 रुपए प्रति माह तक बढ़ाया जाए तथा…

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ट्रेड यूनियन के विषय में गाँधी जी के विचार

ट्रेड यूनियन का विचार निश्चित रूप से यूरोप से आया, ऐसा इसलिए था क्योंकि यूरोप में सबसे पहले औद्योगिक क्रांति हुई थी, लेकिन गांधीजी ट्रेड यूनियन गतिविधियों को नैतिक आधार देने वाले पहले व्यक्ति थे, उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन का उद्देश्य सेवा करना होना चाहिए। श्रमिक वर्ग के लिए न्याय सुनिश्चित करना और उन्हें सच्चा नागरिक बनाना ट्रेड यूनियन का उद्देश्य होना चाहिए गांधीजी के लिए ट्रेड यूनियन गतिविधियाँ श्रमिकों के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास का एक और विचार था। :स्रोत इंटक 50 इयर्स महात्मा गांधी जी का श्रमिकों व् किसानों के उत्थान  के लिए अविस्मरणीय योगदान रहा। गांधीजी के नेतृत्व में बिहार के चंपारण जिले में सन 1919 में एक बड़ा सत्याग्रह हुआ वहां पर नील की खेती करने वाले किसानों की स्थिति दयनीय थी। अंग्रेजों के राज में उनका शोषण हो रहा था इसके विरुद्ध उन्होंने सत्याग्रह किया। गांधी जी के विचार व सिद्धांत पूर्णतया अहिंसा पर आधारित थे। ट्रेड यूनियन एवं श्रमिकों के उत्थान के परिपेक्ष में भी उन्होंने राह दिखाई। समय बदला साथ-साथ ट्रेड यूनियन एवं उनके आंदोलन के स्वरूप में कई बार बदलाव आए परंतु उनके सिद्धांत आज भी हमें रास्ता दिखाते हैं…

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ट्रेड यूनियन एकीकरण की आवश्यकता

तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम कार्यकर्ताओं की बैठक श्रमिक संगठन इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ जी संजीव रेड्डी ने हैदराबाद स्थित सुंदरिया विज्ञान केंद्र में आयोजित तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम कार्यकर्ताओं की बैठक में संबोधित करते हुए कहां के हाल के वर्षों में भारत में ट्रेड यूनियन का एकीकरण श्रमिक आंदोलन पर परिदृस्य में एक महत्वपूर्ण विकास रहा है। परंपरागत रूप से भारत में बहुत सारी ट्रेड यूनियन रही हैं जो अक्सर वैचारिक या औद्योगिक आधार पर विभाजित होती हैं हालांकि एकता के कई कारणों से एकीकरण पर जोर दिया गया है। ट्रेड यूनियनों ने नियुक्ताओं और सरकार के सामने एक एकीकृत मोर्चा पेश करने के महत्व को तेजी से महसूस किया है। अपने प्रयासों को मजबूत करके उनका लक्ष्य कई छोटे और मध्यम आकार के ट्रेड यूनियन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों के अधिकारों और ही तो बेहतर रक्षा करना है, और एकीकरण श्रमिकों के बेहतर समन्वय और अधिक कुशल प्रतिनिधित्व की अनुमति देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनकी चिताओं को व्यापक रूप से संबोधित किया जाता है । जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक विचार के साथ अधिक एकीकृत होती…

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बाबासाहेब का श्रमिकों से सरोकार

बाबासाहेब का श्रमिकों से सरोकार भारत रत्न बाबासाहेब, डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारतीय संविधान के निर्माता, दार्शनिक, अर्थशास्त्री,  समाज सुधारक, कुशल राजनीतिज्ञ एक महान व्यक्तित्व के महापुरुष थे। यदि  हम उनकी महान जीवन यात्रा व कार्यों को अध्यन करें तो हम जान सकते है कि उनका पूरा जीवन शिक्षा के प्रसार और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित था। उनका जीवन दृढ़ विश्वास और उनका व्यक्तिगत साहस से भरा था। ” जीवन लंबा होने की बजाय महान होना चाहिए “ भारत के संविधान के रचियता बाबासाहेब का जीवन देश के लिए समर्पित रहा। अगर हम महिलाओ व श्रमिकों के अधिकारों , उत्थान लिए उनके योगदान की बात करें तो महिलाओं के अधिकार से लेकर श्रमिकों के उत्थान के लिए उनका गहरा सरोकार था। उन्होंने कहा, “मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूं.” । उन्होंने दहेज प्रथा की कुरीति और महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार के विषय को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया । “मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूं.” श्रमिकों के उत्थान की दिशा में उनका विशेष योगदान रहा।…

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