विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
आंकड़ों के अनुसार आज लगभग 15 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी का शिकार बन रहे हैं। ये आंकड़े एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 6.2 करोड़ जबकि अकेले अफ्रीका में 7.2 करोड़ है, जो की सबसे ज्यादा है और चिंताजनक है। दुनिया भर में बाल मजदूरी के कारण में नन्हे सपनों और उनकी अच्छी परवरिश बाल मजदूरी के बोझ में दब रही है । इस समस्या को सामने लाने और इसका सुचारू रूप से समाधान करने के लिए विश्व बाल श्रम दिवस को मनाए जाने की शुरुआत की गई। बाल श्रम दिवस क्यों मनाया जाता है बाल श्रम एक अपराध है, जिसमें बाल श्रम से ग्रसित बच्चे का भविष्य तो अंधकार में जाता ही है। बल्कि यह किसी भी देश की तरक्की और विकास में भी सबसे बड़ी अड़चन पैदा करता है। बच्चे देश का भविष्य होते हैं, लेकिन जब इन्हीं बच्चों का भविष्य अंधकार में होगा तो देश का भविष्य कैसे उज्जवल हो सकता है। इसलिए ही बच्चों को शोषण बाल श्रम से बचाने के लिए हर साल 12 जून को बाल श्रम दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया, जिससे बाल श्रम जैसे मुद्दों को सामने लाया जा सके…
Read moreमहान स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद बिस्मिल
रामप्रसाद बिस्मिल का नाम भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में जाना जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। बचपन से ही वे असाधारण प्रतिभा की धनी थे। युवावस्था में ही देश सेवा के लिए समर्पित हो कर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सक्रिय हो गए । राम प्रसाद बिस्मिल निकाय प्रसिद्ध कविताएं लिखी जिसमें “दुनिया से गुलामी का नाम मिटा दूंगा” । इसमें लगातार देश के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अशफ़ाकउल्ला खा व अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की नींव रखी उसके बाद भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद और अन्य वरिष्ठ नेता क्रांतिकारी इस संगठन से जुड़े। काकोरी रेल कांड काकोरी रेल कांड का नाम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक बड़ी घटना के रूप में लिया जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए धन की आवश्यकता थी। जब क्रांतिकारियों ने उत्तर प्रदेश में एक रेल को लूटने की योजना के अनुसार काकोरी से चली रेल को रोक कर धावा बोला। अंततः वही अंजाम हुआ स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन को देश के लिए समर्पित करने का जो प्रण लिया था। रामप्रसाद…
Read moreकामगारों के लिए साफ़ पानी की व्यवस्था हो
तापमान 50 के पार -कामगारों के लिए साफ़ पानी की व्यवस्था हो दिल्ली में बढ़ते हुए तापमान के कारण जनजीवन मानो थम सा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ दिनों में तापमान ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं दिल्ली का तापमान 52 डिग्री तक दर्ज किया गया अनुमान है कि यह आज तक का सबसे ज्यादा तापमान था। इसी को देखते हुए दिल्ली के श्रम विभाग दिल्ली सरकार द्वारा कुछ निर्देश जारी किए गए जिसके अंतर्गत कामगारों के लिए साफ़ पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए तथा पंखे या कूलर की व्यवस्था भी हो। श्रमिकों को जागरूक किया जाये की कैसे वो हीट स्ट्रोक से बच सकते हैं । इसी बीच दिल्ली के उपराज्यपाल ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए निर्देश जारी किए हैं जिसके अंतर्गत श्रमिकों को 12 बजे से 3 बजे तक काम नहीं करना होगा और उनका वेतन भी नहीं काटा जाएगा। दूसरी भाषा में कहें तो 12 से 3 बजे तक का समय सवेतन छुट्टी का रहेगा। इसी बीच कुछ श्रमिक नेताओं का यह कहना है कि निश्चित रूप से यह फैसला श्रमिकों के हित में है परंतु इन निर्देशों को लागू करने के…
Read moreमहान उद्योगपति जमशेदजी टाटा
जमशेदजी टाटा टाटा ग्रुप उद्योग जगत के बड़े नामों में से एक है। कौन होगा जो टाटा ब्रांड से परीचित नहीं….टाटा नमक, टाटा मोटर्स, टाटा कंसल्टी और भी कुछ। टाटा ग्रुप ने, फूड इंडस्ट्री से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी तक हर क्षेत्र में अपने ब्रांड का प्रसार किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं, इन सब की शुरुआत करने वाले और टाटा के नाम को पहचान दिलाने वाले जमशेदजी टाटा के बारे में…. अगर नहीं तो… आज के लेख में हम जमशेदजी टाटा और उनके जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नजर डालने का प्रयास करेंगे। जमशेदजी टाटा का जीवन परिचय: जमशेदजी टाटा का जन्म सन् 1839 में 3 मार्च के दिन हुआ था। वे एक पारसी परिवार में जन्में थे। जमशेदजी के पिताजी नुसीरवानजी और माता जीवनबाई टाटा थी। नुसीरवानजी अपने सपने पूरे करने मुम्बई चले आए, जिसमें उनका साथ जमशेदजी ने भी दिया, जो 14 साल की छोटी सी उम्र में ही अपने पिता का हाथ बंटाने के लिए उनके साथ मुंबई चले आए। जमशेदजी ने कॉलेज खत्म करने के बाद पूरी तल्लीनता से खुदको पिताजी के व्यवसाय में समर्पित…
Read more87 countries participate in The Art of living’s Global Happiness Program
87 countries participate in The Art of living’s Global Happiness Program; Mark Gurudev’s 68th Birth Anniversary 13 May 2024, Bengaluru: Lakhs of people from 87 countries embarked on their journey to better mental health and happiness as part of the Global Happiness Program organized by The Art of Living across the globe to mark the 68th birth anniversary of the organization’s founder, humanitarian leader, and global peace ambassador, Gurudev Sri Sri Ravi Shankar. In India, lakhs of devotees celebrated the special day immersed in service, music, and spreading happiness in their communities. “Every day is a happy day when we are soaked in knowledge,” Gurudev shared in the public gathering attended by thousands of people from across the country at the scenic The Art of Living International Center, “When our life is dedicated to seva, satsang, sadhana, we find that every day becomes a celebration. Bring happiness to everyone. This thought “I am here to bring joy to everybody” will clear a path and make things the way you want it to be.” As part of the Global Happiness Program, participants reported feeling happier; clear in their minds; pain…
Read moreश्री श्री रविशंकर जी का जन्मदिवस
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी का जन्मदिवस श्री श्री रवि शंकर जी अध्यात्म की दुनियां का बहुत बड़ा नाम है। भारत की मिट्टी से कईं महापुरुषों का अवतरण हुआ है जिसमें से श्री रविशंकर जी का नाम भी शामिल है। वे एक आधुनिक अध्यात्म गुरु तो हैं हीं, लेकिन उनके कामों के लिए उन्हें एक शांति राजदूत, मानववादी गुरु के रुप में जाना जाता है। आज के आर्टिकल में हम रविशंकर जी के और उनके कार्यों के बारे में जानेंगे। इस लेख में हम श्री श्री रवि शंकर जी के जीवन पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैं। रविशंकर जी का प्रारंभिक जीवन 13 मई 1956 के दिन दक्षिण भारत के तमिलनाडु में श्री श्री रविशंकर जी का जन्म हुआ। इनके पिता का नाम श्री वेंकट रत्नम् और माता का नाम विशालाक्षी था। इनके पिताजी ने आदि शंकराचार्य जी से प्रेरित होकर इनका नाम रविशंकर रखा। रविशंकर जी की प्रतिभा भी बचपन में ही दिखने लगी। बचपन से ही इनका झुकाव अध्यात्म के प्रति था। मात्र 4 वर्ष की आयु में ही वे भागवत गीता का संस्कृत में व्याख्यान किया करते थे। इतना ही नहीं रविशंकर जी…
Read moreचर्चा मदर्स डे से जुड़ी बातों पर
मां बहुत ही संक्षिप्त लेकीन विस्तृत शब्द है, जिसमें श्रृष्टि के सृजन से लेकर उसमें पल रहे जीवन पोषण का निहित है। मां की उपाधि एक महिला को जीवन में ऐसे स्तर पर पहुंचा देता है, जहां से वो और सुदृढ़, मजबूत और ज्यादा प्रेममय हो जाती हैं। हम सभी के जीवन में मां का बहुत महत्त्व होता है, आइए जानते हैं, मदर्स डे को मानने के पीछे का इतिहास और इसके पीछे की कहानी जानते हैं…… मदर्स डे 2024 मदर्स डे किसी एक तारीख को नहीं मनाया जाता है, क्योंकि इसके लिए कोई एक तारीख निश्चित नहीं होती। यह मई महीने के दुसरे सप्ताह में पड़ने वाले रविवार को मनाया जाता है। इस साल 2024 में मदर्स डे 12 मई को मनाया जाएगा। मदर्स डे को मातृत्व दिवस, मदरिंग दे के नाम से भी जाना जाता है। मातृत्व दिवस को भारत समेत कईं देशों में मनाया जाता है और क्योंकि यह रविवार को मनाया जाने वाला दिवस है, इसलिए इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी होता है। हालांकि कई देशों में 8 मार्च यानी की वूमेंस डे को ही मदर्स डे के तौर पर मनाया जाता है। मदर्स डे…
Read moreरेड क्रास डे का क्या महत्व है
रेड क्रास डे का महत्व आज के आर्टिकल में हम रेड क्रास डे के बारे में बात करने जा रहे हैं। जहां हम रेड क्रॉस का इतिहास, और इसके महत्व के बारे में जानेंगे। रेड क्रॉस सोसाइटी की शाखाएं विश्वभर के 180 से भी देशों में फैली हुई हैं जो महामारी या किसी भी प्राकृतिक आपदा जैसे मुश्किल और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की मदद करती हैं। चलिए जानते हैं रेड क्रॉस सोसाइटी के बारे में, कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्या है इसका इतिहास… रेड क्रॉस सोसाइटी क्या है रेड क्रॉस एक अंतराष्ट्रीय सोसाइटी हैं और इसके संस्थापक हेनरी ड्यूरेंट हैं। प्रथम विश्व युद्ध में हुए भयंकर नर संहार के बाद सन 1919 में रेड क्रॉस सोसाइटी या रेड क्रिसेंट सोसाइटी की स्थापना की गई। वर्तमान में रेड क्रॉस अंतर्राष्ट्रीय समिति की शाखाएं पूरी दुनियां में फैली हुई हैं। यह समिति निस्वार्थ भाव और बिना किसी पक्षपात के प्राकृतिक आपदा, ऐसी ही आपातकालीन परिस्थितियों में मानव जाति की सेवा करती है। सबसे पहला रेड क्रॉस डे साल 1919 में बनाया गया था। क्योंकि हेनरी ड्यूरेंट इस सोसाइटी की शुरुआत की थी इसलिए उनके जन्मदिवस यानी की 8 मई…
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