राजीव गांधी: दूरदर्शी नेतृत्व और कंप्यूटर-तकनीक की नींव

राजीव गांधी “India missed the Industrial Revolution; it cannot afford to miss the Computer Revolution.” Rajiv Gandhi आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न श्री राजीव गांधी की जयंती पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन  करते हैं। राजीव गांधी जी का नाम भारत में कंप्यूटर क्रांति, तकनीकी बदलाव, सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के विस्तार के अध्याय के आरम्भ से जुड़ा है। अपने दूरदर्शी नेतृत्व में उन्होंने यह समझा कि भविष्य में विज्ञान और तकनीक भारत की प्रगति में ,महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके प्रयासों ने देश में आधुनिक तकनीक के लिए नई सोच और नई संभावनाओं का रास्ता खोला। भारत में कंप्यूटर, कंप्यूटर क्रांति और सूचना प्रौद्योगिकी भारत में कंप्यूटर, कंप्यूटर क्रांति और सूचना प्रौद्योगिकी के विकास की बात होती है तो पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न राजीव गांधी जी के दौर का जिक्र जरूर आता है। आज कंप्यूटर और तकनीक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन 1980 के दशक में स्थिति बिल्कुल अलग थी। उस समय कंप्यूटर आम लोगों के लिए नई और कुछ हद तक अनजानी चीज थी। राजीव गांधी जी ने उस समय यह समझने की कोशिश की कि आने वाले वर्षों में तकनीक भारत…

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अरविंद घोष: राष्ट्रसेवा से अध्यात्म तक की प्रेरणादायी यात्रा

श्री अरविंद घोष एक विरल व्यक्तित्व थे-एक तरफ क्रांतिकारी, तो दूसरी तरफ दार्शनिक; एक तरफ शूरवीर, तो दूसरी तरफ कवि। उनकी जयंती 15 August पर हम सब उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन अर्पित करते हैं “सच्चा ज्ञान चिंतन से प्राप्त नहीं होता। यह वह है जो आप हैं; यह वह है जो आप बनते हैं।” अरविंद घोष एक महान कवि आध्यात्मिक चिंतक में राष्ट्रवादी नेताओं में उनका नाम प्रसिद्ध है उनका जन्म कोलकाता में हुआ था उनके पिता एक चिकित्सक थे अरविंद जी की शुरुआती पढ़ाई देश में हुई लेकिन बाद में वह इंग्लैंड से लेकर और कैंब्रिज विश्वविद्यालय में अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की वह प्रांत भारतीय सिविल परीक्षा भी पास की स्वदेश वापसी और भारत की पहचान सन् 1893 में जब वे भारत वापस लौटे, तो उन्होंने अपनी धरती की संस्कृति, दर्शन और साहित्य का सूक्ष्म अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें गहराई से अनुभव हुआ कि भारत में एक नए राष्ट्रीय पुनर्जागरण की अत्यंत आवश्यकता है। बंगाल विभाजन 1905 में जब ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का विभाजन किया, तो समूचा देश क्षुब्ध हो उठा। उन्होंने न केवल ‘स्वदेशी’ और ‘बहिष्कार’ के प्रस्तावों का जोरदार समर्थन किया, बल्कि इसे जन-जन का अभियान…

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मैडम भीकाजी कामा- महान स्वतंत्रता सेनानी

भीकाजी कामा पुण्यतिथि पर स्मरण व् श्रद्धांजलि भीकाजी कामा का प्रारंभिक जीवन भीकाजी कामा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उन प्रमुख महिला सेनानियों में शामिल थीं, जिन्होंने देश की आजादी की आवाज को भारत की सीमाओं से बाहर तक पहुंचाया। उनका जन्म 24 सितंबर 1861 को मुंबई के एक प्रतिष्ठित पारसी परिवार में हुआ था। उनका विवाह रुस्तम कामा से हुआ। देश की गुलामी और भारतीयों की स्थिति ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला और धीरे-धीरे वह राष्ट्रवादी गतिविधियों से जुड़ती चली गईं। समाज सेवा से स्वतंत्रता संघर्ष तक 1896 में मुंबई में प्लेग महामारी फैलने के दौरान भीकाजी कामा ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सक्रिय रूप से काम किया। लोगों की सेवा करते हुए वह स्वयं भी बीमार पड़ गईं। स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्हें यूरोप जाना पड़ा। यूरोप में रहने के दौरान उनका संपर्क भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई राष्ट्रवादी नेताओं और क्रांतिकारियों से हुआ। इसके बाद उनका जीवन भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष के लिए और अधिक समर्पित हो गया। विदेश से ब्रिटिश शासन का विरोध भीकाजी कामा ने विदेश में रहते हुए ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता की आवाज उठाई। उन्होंने…

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