विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
आंकड़ों के अनुसार आज लगभग 15 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी का शिकार बन रहे हैं। ये आंकड़े एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 6.2 करोड़ जबकि अकेले अफ्रीका में 7.2 करोड़ है, जो की सबसे ज्यादा है और चिंताजनक है। दुनिया भर में बाल मजदूरी के कारण में नन्हे सपनों और उनकी अच्छी परवरिश बाल मजदूरी के बोझ में दब रही है । इस समस्या को सामने लाने और इसका सुचारू रूप से समाधान करने के लिए विश्व बाल श्रम दिवस को मनाए जाने की शुरुआत की गई। बाल श्रम दिवस क्यों मनाया जाता है बाल श्रम एक अपराध है, जिसमें बाल श्रम से ग्रसित बच्चे का भविष्य तो अंधकार में जाता ही है। बल्कि यह किसी भी देश की तरक्की और विकास में भी सबसे बड़ी अड़चन पैदा करता है। बच्चे देश का भविष्य होते हैं, लेकिन जब इन्हीं बच्चों का भविष्य अंधकार में होगा तो देश का भविष्य कैसे उज्जवल हो सकता है। इसलिए ही बच्चों को शोषण बाल श्रम से बचाने के लिए हर साल 12 जून को बाल श्रम दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया, जिससे बाल श्रम जैसे मुद्दों को सामने लाया जा सके…
Read moreविश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बातचीत
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर इंटक के राष्ट्रीय महासचिव डा संजय कुमार सिंह ने प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहाँ की, कई जगह बल श्रमिक काम करते हुए दिखेंगे। हमारा मानना हैं कानून बने हैं पर आवश्यक हैं की कानूनों को सख्ती से परिपालन हो । बच्चे इस देश का भविष्य हैं उनके पढ़ने,खाने,रहने की व्यवस्था होनी चाहिए। हम सभी का सामाजिक दायित्व बनता हैं मिल कर प्रयास करें । बाल श्रम के विरुद्ध ट्रेड यूनियन संगठन काम कर रहे हैं हम इस मुद्दे पर सजग हैं पर इस विषय पर मिल कर जागरूकता व सरोकार के साथ काम करना होगा। सिंह ने कहाँ, मजदूर चाहे संगठित क्षेत्र में हो या असंगठित क्षेत्र में वह मजदूर होता हैं । संगठित क्षेत्र में अधिक सुविधाएं हैं , असंगठित क्षेत्र में भी योजनाएँ हैं पर उन योजनाओ का कार्यान्यवन करवाना बड़ी समस्या हैं ।
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