इकोसिस्टम की रक्षा करने और उसे बहाल करने से जलवायु परिवर्तन की मात्रा में कमी लाने में और इसके प्रभावों से निपटने में हमें सहायता मिल सकती है
भारत ने जी-20 की अपनी अध्यक्षता में भूमि क्षरण को रोकने, इकोसिस्टम की बहाली की गति मे तेजी लाने और जैवविविधता को समृद्ध करने के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में न्यूनीकरण और अनुकूलन को गहराई से सन्निहित किया है : श्री भूपेंद्र यादव
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि इकोसिस्टम की रक्षा करने और उसे बहाल करने से जलवायु परिवर्तन की मात्रा में कमी लाने में और इसके प्रभावों से निपटने में हमें सहायता मिल सकती है। जापान के सैप्पारो में जलवायु, ऊर्जा एवं पर्यावरण पर जी7 मंत्रियों की बैठक में पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम पर्यावरणगत कदमों के साथ साथ समग्र रूप से जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि हम जरुर यह उम्मीद करते कि जी7 देशों के जलवायु, ऊर्जा एवं पर्यावरण मंत्रियों की इस बैठक के विचार विमर्शों के यह मूल में हो।
Spoke at the Plenary Session at the G7 Ministers' Meeting on Climate, Energy and Environment in Japan.
Under PM Shri @narendramodi ji, India has embedded mitigation & adaptation across priority areas of arresting land degradation, ecosystem restoration & enriching biodiversity. pic.twitter.com/SWRmJ1EOhO
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) April 16, 2023
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उदाहरण के लिए भारत ने अपनी जी-20 की \अध्यक्षता में इस दृष्टिकोण को अपनाया है और भूमि क्षरण को रोकने, इकोसिस्टम की बहाली की गति मे तेजी लाने और जैवविविधता को समृद्ध करने के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में न्यूनीकरण और अनुकूलन को गहराई से सन्निहित किया है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण एक टिकाऊ और गतिशील सामुद्रिक ( नीली ) अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, परस्पर एक दूसरे से जुड़ी विषयवस्तुओं के साथ पर्यावरण के लिए जीवनशैली ( लाइफ ) के साथ संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करता है और इस प्रकार जलवायु परिवर्तन को मुख्यधारा में लाता है तथा एक महत्वाकांक्षी, निर्णायक और कार्रवाई-उन्मुखी तरीके से प्रभावों पर ध्यान देता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने मिशन लाइफ के माध्यम से व्यक्तिगत और सामुदायिक कदमों सहित सभी के द्वारा कार्रवाई पर भी ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि केवल व्यक्तिगत और सामुदायिक व्यवहार को बदलने से ही पर्यावरणगत और जलवायु संकटों में महत्वपूर्ण कमी आ सकती है।






