बाबासाहेब का श्रमिकों से सरोकार

बाबासाहेब का श्रमिकों से सरोकार

भारत रत्न बाबासाहेब, डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारतीय संविधान के निर्माता, दार्शनिक, अर्थशास्त्री,  समाज सुधारक, कुशल राजनीतिज्ञ एक महान व्यक्तित्व के महापुरुष थे। यदि  हम उनकी महान जीवन यात्रा व कार्यों को अध्यन करें तो हम जान सकते है कि उनका पूरा जीवन शिक्षा के प्रसार और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित था। उनका जीवन दृढ़ विश्वास और उनका व्यक्तिगत साहस से भरा था।

” जीवन लंबा होने की बजाय महान होना चाहिए “

भारत के संविधान के रचियता बाबासाहेब का जीवन देश के लिए समर्पित रहा। अगर हम महिलाओ व श्रमिकों के अधिकारों , उत्थान लिए उनके योगदान की बात करें तो महिलाओं के अधिकार से लेकर श्रमिकों के उत्थान के लिए उनका गहरा सरोकार था। उन्होंने कहा, “मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूं.” । उन्होंने दहेज प्रथा की कुरीति और महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार के विषय को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया ।

“मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूं.”

श्रमिकों के उत्थान की दिशा में उनका विशेष योगदान रहा। उनके श्रमिक वर्ग के प्रति सरोकार के चलते 1942 में श्रमिकों के कार्य के घंटे 12 घंटे से कम करके  8 घंटे करने का नियम बनाया गया। महिला श्रमिकों के लिए महिला श्रमिक कल्याण कोष व अन्य श्रमिक हितेषी कार्य श्रमिकों के प्रति उनके सरोकार को दर्शाते हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई अन्य श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं का भी प्रावधान किया। श्रमिकों के उत्थान के लिए अधिकारों के लिए उनकी रहनुमाई में कई प्रावधान, कानून बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही । उनके नव दृष्टिकोण के चलते रोजगार कार्यालय स्थापित किये गए ।

आधुनिक भारत के निर्माण में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का योगदान अतुलनीय है।  उनका पूरा जीवन राष्ट्र की प्रगति के लिए समर्पित था।

उनके जयंती उन्हें शत शत नमन। विनम्र श्रद्धांजलि ।

लेखक वशिष्ट

 

 

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