दिल्ली भाजपा लगातार दिल्ली के मुद्दों को उठाकर मजबूत विपक्ष की भूमिका में हैं। इसी क्रम में दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने प्रेस वार्ता कर शिक्षा से जुड़े सवाल उठाए हैं ।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है और आज एक स्कूल की आधारशिला रखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूल देने का दावा महज भद्दा मजाक है ।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहाँ दिल्ली में कोई शिक्षा क्रांति नहीं है बल्कि हमने दिल्ली में शासन में भ्रष्टाचार का चरम देखा है । हर साल सरकारी स्कूलों से स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है और सरकारी स्कूलों में विफलता दर में भारी वृद्धि हुई है । यह सब दिल्ली के एक कम पढ़े – लिखे पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा लागू की गई नो डिटेंशन पॉलिसी का नतीजा है ।
ट्विटर से
हर साल सरकारी स्कूलों से स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है और सरकारी स्कूलों के विफलता दर में भी वृद्धि हुई है। यह सब दिल्ली के एक कम पढ़े-लिखे पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा लागू की गई नो डिटेंशन पॉलिसी का नतीजा है। pic.twitter.com/H1VxPz0N8M
— Virendraa Sachdeva (@Virend_Sachdeva) April 8, 2023
इस नो डिटेंशन पॉलिसी के कारण कक्षा 1 से 8 के छात्रों ने पढ़ाई पर बहुत कम ध्यान दिया क्योंकि उन्हें पता था कि उन्हें पदोन्नत किया जाएगा और परिणामस्वरूप कमजोर शैक्षिक नींव वाले छात्र नौवीं कक्षा में पहुंच गए जहां वे परीक्षा में असफल रहे ।
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि एक स्कूल अपने अच्छे भवन से नहीं बल्कि अपने शिक्षण स्टाफ और अच्छे परिणाम से सफल होता है । पिछले 8 वर्षों के सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन के अनुभव को देखते हुए , जिसमें शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की पूरी ताकत के बिना स्कूल चल रहे हैं , नए स्कूलों से भी ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती है ।
नए स्कूल में विदेशी भाषा पढ़ाने के सीएम के दावे में कुछ भी नया नहीं है । सभी निजी स्कूल और यहां तक कि कई सरकारी स्कूल दशकों से दिल्ली में विदेशी भाषाओं को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ा रहे हैं , इसलिए इसमें जश्न का कोई कारण नहीं है ।






