दीपक शर्मा-मंज़िल से अधिक महत्वपूर्ण है संघर्ष
दीपक शर्मा –पोस्टर चिपकाने से लेकर राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियों तक… एक संघर्ष और जनसेवा की यात्रा बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस व्यक्ति ने संगठन में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत पोस्टर चिपकाने जैसे साधारण कार्य से की थी, वही आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारियाँ निभाएगा, विधानसभा चुनावों में पर्यवेक्षक और समन्वयक के रूप में कार्य करेगा, देश के वरिष्ठ नेताओं के साथ जनहित के मुद्दों पर चर्चा करेगा और टीवी बहसों में अपनी पार्टी का प्रभावी पक्ष रखेगा। शक्ति नहीं, सेवा के लिए राजनीति यह कहानी है दीपक शर्मा की- एक ऐसे युवा की, जिसने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। उनके लिए राजनीति शक्ति प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सेवा, जनकल्याण और सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम है। दृढ़ इच्छाशक्ति से जनसेवा तक दिल्ली के एक साधारण परिवार में जन्मे दीपक शर्मा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए असाधारण परिस्थितियों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और स्पष्ट उद्देश्य की आवश्यकता होती है। संघर्ष, सामाजिक सरोकार, वैचारिक प्रतिबद्धता, संगठनात्मक क्षमता और जनसेवा-दृढ़…
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