कृषि शिक्षा को उद्यमशीलता का केंद्र बनाया जाना चाहिएः उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र निर्माण में ‘अन्नदाता’ के योगदान को स्वीकार किया और कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया

उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज नई दिल्ली में आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई) के 61वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। दीक्षांत समारोह के अपने भाषण में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की प्रगति के लिए कृषि शिक्षा को अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता का केंद्र बनाया जाना चाहिए।

कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए, श्री धनखड़ ने राष्ट्र की संपूर्ण प्रगति में ‘अन्नदाता’ के उल्लेखनीय योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने देश के कृषि क्षेत्र की प्रतिबद्धता की सराहना की, जिसने 800 मिलियन से अधिक लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने को संभव बनाया। वह भी उस समय जब दुनिया महामारी के संकट से गुजर रही थी।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि आईसीएआर-आईएआरआई का विशाल प्रतिभा पूल उन सभी तबकों से लिया गया है जो सही मायने में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, “यह उस खंड से लिया गया है जिसमें सबसे प्रामाणिक उद्यम, मिशन और देश के लिए सब कुछ देने का जुनून है।”

श्री धनखड़ ने युवा प्रतिभाओं से भारत की उपलब्धियों और लोकतंत्र की जननी के रूप में इसकी साख पर गर्व करने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए कहा कि यह संवाद, बहस, चर्चा और विचार-विमर्श के लिए है और इसे व्यवधान व अशांति का मंच नहीं बनना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत दिए गए विशेषाधिकार बड़ी जिम्मेदारी के साथ मिलते हैं और जिसे नकार नहीं जा सकता है।

यह बताते हुए कि सदन के अंदर सदस्यों द्वारा कही गई बातों के लिए उनके खिलाफ कोई दीवानी व फौजदारी मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है, श्री धनखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि उपयुक्त विचार और चिंतन के बाद ही संसद में प्रत्येक शब्द बोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “संसद को सूचनाओं के गिरावट का मंच नहीं बनने दिया जा सकता।”

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