एनबीसीसी को माननीय राष्ट्रपति कार्यालय ने भेजा प्रशस्ति पत्र
विरासत को संजोया: राष्ट्रपति निलयम, हैदराबाद में ऐतिहासिक ध्वज स्तंभ के वुडन रेप्लिका का निर्माण
एनबीसीसी ने किया देश के सबसे ऊंचे लकड़ी के ध्वज स्तंभ का निर्माण
भारत के माननीय राष्ट्रपति कार्यालय ने 14.05.2024 को एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के सीएमडी, श्री के. पी. महादेवास्वामी को प्रशस्ति भेजते हुए सीएमडी समेत एनबीसीसी की टीम को राष्ट्रपति निलयम, हैदराबाद स्थित ऐतिहासिक ध्वज स्तंभ के लकड़ी के रेप्लिका को बनाने में अहम भूमिका के निर्वहन पर सराहा है। माननीय राष्ट्रपति कार्यालय ने रिकॉर्ड समय में राष्ट्रपति निलयम स्थित ऐतिहासिक ध्वज स्तंभ रेप्लिका निर्माण के सराहनीय कार्य के लिए सीएमडी, एनबीसीसी एवं समस्त टीम की प्रशंसा करते हुए प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया,” The dedication and hard work shown by Shri K.P. Mahadevaswamy, CMD, NBCC and NBCC team were truly instrumental in completion of the project.”
राष्ट्रपति निलयम, हैदराबाद में 21.12.2023 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमति द्रोपदी मुर्मु ने ध्वज स्तंभ के रेप्लिका का अनावरण किया था। इस कार्यक्रम में एनबीसीसी एवं राष्ट्रपति निलयम से अधिकारीगण उपस्थित थे।
यह देश का सबसे ऊंचा लकड़ी का ध्वज स्तंभ है। ध्वज स्तंभ की कुल उंचाई पुरानी नींव से 36 मीटर (लगभग 120 फीट) है। हाल ही में अनावरित किए गए इस ध्वज स्तंभ को 80 वर्षों से भी अधिक पुरानी एवं उच्च गुणवत्ता वाली सागवान की लकड़ी से बनाया गया है। ध्वज स्तंभ संतुलित रहे इसके लिए, नींव से कुल 18 स्टील तारों को स्तंभ के साथ बांधा गया है। समस्त निर्माण कार्य को सभी आवश्यक दिशानिर्देश एवं औपचारिकताओं को पूरा करते हुए उच्चतम गुणवत्ता के साथ किया गया है। ध्वज स्तंभ के निर्माण का समस्त कार्य 2 महीने से भी कम की अवधि में पूर्ण कर लिया गया था। ध्वज स्तंभ निर्माण कार्य के निर्णायक अवसर पर भारी तूफान व बरसात का सामना करते हुए भी एनबीसीसी टीम ने निर्माण कार्य को नियत अवधि के भीतर ही पूरा किया। एनबीसीसी टीम के कुशल नेतृत्व व काम के प्रति समर्पण के कारण ही ऐसा संभव हो पाया।
राष्ट्रपति निलयम, हैदराबाद ने भी वर्षों के अंतराल में इतिहास के कई उतार चढ़ाव देखे हैं। यह ध्वज स्तंभ भारत की स्वतंत्रता एवं संप्रभु गणराज्य बनने की संघषपूर्ण यात्रा का साक्षी रहा है। साथ ही यह ध्वज स्तंभ वर्ष 1948 में हैदराबाद रियासत के भारत गणराज्य में विलय का भी साक्षी रहा है।
हालांकि बीतते समय का असर इस ऐतिहासिक विरासत पर पड़ा और यह मौसम की मार झेलते हुए अपना असतित्व खोती जा रही थी। देश के स्वर्णिम इतिहास, अटूट भावना एवं अतीत की इस महत्वपूर्ण विरासत के महत्व को देखते हुए, एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने इस ध्वज स्तंभ को संरक्षित करने का प्रयास किया। यह प्रतीकात्मक संरचना, देशभक्ति एवं विरासत की भावना से परिपूर्ण एवं अखंडता की भावना के प्रतीक के रूप में स्थापित होने के साथ देशवासियों को एकजुट करती है।
ऐसे विश्व में जहां समय को सेकंड व मिनट में मापा जाता है, वहां एनबीसीसी का यह प्रयास सांस्कृतिक विरासत के प्रति सजगता को दर्शाता है। नवनिर्मित ध्वज स्तंभ पर लहराता तिरंगा, देशवासियों के लिए उम्मीद की किरण होने के साथ भारत के लिए बलिदान देने वालों का स्मरण कराता है।
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