अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए बेहद जरूरी

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन तथा श्रम और रोजगार मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए बेहद जरूरी है। मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाने के लिए आयोजित एक विशेष समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम अक्सर पर्यावरण से सब कुछ लेते हैं लेकिन अपशिष्ट वापस कर देते हैं। विकास के साथ हमारी खपत बढ़ जाती है।

श्री यादव ने कहा कि यदि हम अनावश्यक उपभोग को प्रोत्साहित करेंगे तो एक पृथ्वी इसे पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में हमें विकास के साथ-साथ जैव विविधता के संरक्षण का मार्ग प्रशस्त करना होगा।

मिलेट्स के महत्व पर बोलते हुए श्री यादव ने कहा, “मिलेट्स वोकल फॉर लोकल के नारे को बढ़ावा देते हैं। यह एक ऐसी फसल है जो भारतीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल है। सूखा प्रतिरोधी होने के साथ-साथ पोषण की कमी को कम करने के लिए मिलेट्स महत्वपूर्ण हैं। जैव विविधता बोर्ड ने मिलेट्स को विशेष महत्व दिया है। इसका उद्देश्य कमजोर समुदायों के साथ पहुंच और लाभ साझा करना सक्षम करना है।”

श्री यादव ने दोहराया कि पर्यावरण की रक्षा देश के लिए आस्था का विषय है। “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हमारे पास प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच है क्योंकि हमारी पिछली पीढ़ी ने उनकी रक्षा की थी। और यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी रक्षा करें। यह आज के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।”

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री, श्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा, “यदि हम पर्यावरण की रक्षा करते हैं, तो बदले में पर्यावरण हमारी रक्षा करेगा। यदि हम पर्यावरण से जितना लेते हैं उतना वापस नहीं करेंगे तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा और हमें प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ेगा। अगर प्रकृति बची तो हम बचेंगे और पृथ्वी बचेगी।”

मिलेट्स का उल्लेख करते हुए मंत्री जी ने आगे कहा, “भारत की पहल के कारण आज पूरी दुनिया मिलेट्स की ओर आकर्षित हो रही है। एक जन आंदोलन के माध्यम से हमें मिलेट्स के ज्ञान, मांग और आपूर्ति को बढ़ाना है। हमें एक जन आंदोलन बनाने और मिलेट्स के ज्ञान को आम आदमी तक पहुंचाने की जरूरत है।” मंत्री जी ने ‘उज्ज्वल भविष्य की ओर प्रकृति, संस्कृति और साहित्य’ का मंत्र दिया।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सचिव सुश्री लीना नंदन ने कहा, “आज एक ऐसा दिन है जब हम स्वीकार करते हैं कि हमारा जीवन काफी हद तक जैव विविधता पर निर्भर है।”

Press Release

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