नई दिल्ली: देश में पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर इंटक के नेतृत्व में केंद्रीय श्रम संघों (सीटीयू) की घेराबंदी को देखते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने वित्त सचिव टी वी सोमनाथन की अध्यक्षता में विशेष समिति का गठन करने का प्रस्ताव रखा है। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्त सचिव के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई जाएगी जो नई पेंशन स्कीम का रिव्यू करेगी। वित्त मंत्री ने लोक सभा में फाइनेंस बिल पेश किय और हंगामें के बीच ही इस पर वोटिंग हुई। लोकसभा में फाइनेंस बिल को पास करा लिया गया। बता दें कि केंद्रीय श्रमिक संगठन एक लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की सरकार से मांग कर रहे हैं। इतना ही नहीं हिमाचल प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़,राजस्थान और झारखंड की राज्य सरकारों ने अपने कर्मियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी है। अन्य राज्यों के कर्मचारी भी पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ- जी संजीवा रेड्डी ने कहा कि पेंशन कर्मचारी की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

दी इंडियन वर्कर में प्रकाशित समाचार के अनुसार:
पिछले महीने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित इंटक के दो दिवसीय पूर्ण अधिवेशन में भी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को जोर शोर से उठाया गया था। इंटक अध्यक्ष डॉ- रेड्डी ने केंद्रीय वित्तमंत्री की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली और नई पेंशन योजना के रिव्यू के लिए बनी समिति को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
केंद्रीय एवं राज्य सरकार को कर्मियों के साथ निगम तथा निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को भी इस दायरे में लाना होगा। देश के सबसे अधिक सदस्य संख्या वाले एवं एक उत्तरदायी श्रमिक संगठन के नाते इंटक समिति की सिफारिशों पर नजर रखेगी। देश में एक जनवरी 2004 से एनपीएस यानी नई पेंशन स्कीम लागू है। पुरानी पेंशन स्कीम के तहत रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारी के वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है। क्योंकि पुरानी स्कीम में पेंशन का निर्धारण कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी और महंगाई दर के आंकड़ों के अनुसारहोता है। इसके अलावा पुरानी पेंशन स्कीम में पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से कोई पैसा कटने का प्रावधान नहीं है।
डॉ- रेड्डी ने कहा कि सरकारी योगदान द्वारा नई पेंशन योजना (एनपीएस) के स्थान पर पुरानी पेंशन अपने मूल रूप में बहाल होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पुरानी पेंशन बहाली से पेंशन देयता जीडीपी के 1 प्रतिशत से भी कम होगी। इंटक के 33वें पूर्ण अधिवेशन में भी सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव से बचने के लिए नई पेंशन योजना को वापिस कर ओपीएस बहाल करने की मांग रखी थी।








