इंटक का स्थापना दिवस-एक नजर इंटक के इतिहास पर

इंटक का स्थापना दिवस- एक नजर इंटक के इतिहास पर

केंद्रीय ट्रेड यूनियन इंटक की स्थापना 3 मई 1947 को हुई थीं , इंटक के कार्यकर्ता इंटक का स्थापना दिवस मना रहे हैं । नजर डालते हैं इंटक के इतिहास पर, क्या मुद्दे हैं क्या सफर रहा ट्रेड यूनियन संगठन इंटक का।

इंटक की स्थापना – 3 मई 1947 वर्तमान अध्यक्ष – डा. जी संजीवा रेड्डी, पूर्व राज्य सभा सांसद मुख्यालय – नई दिल्ली

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कृपाशंकर वर्मा, इंटक के राष्ट्रीय सचिव का इंडियन वर्कर में लेख जो प्रकाश डालता हैं इंटक के इतिहास पर “हमें आवश्यकता थी एक ऐसे संगठन की जो यहां के श्रमिक वर्ग को सही दिशा दे और प्रयास करे जिससे सामाजिक न्याय, शांति एवं सुरक्षा की संभावना बनी रहे। उसकी कार्यप्रणाली और संविधान अनिवार्य रूप से प्रजातांत्रिक हो जिसमें उसके प्रत्येक घटक को खुली अभिव्यक्ति होगी। ऐसी स्थिति में अपने विचार और कार्यकलाप सही ढंग से करसकेंगे। ये शब्द थे भारत की एकता के निर्माता लौह पुरुष सरकार वल्लभ भाई पटेल के।

‘स्थापना के समय का घटनाक्रम’-

यह विचार उन्हाेंने अपने अध्यक्षीय भाषण में उस अवसर पर रखे थे जिसमें राष्ट्रीय नेता, पंडित जवाहरलाल नेहरू, शंकर नामदेव, बाबू जगजीवरराम, बी जी खेर, रामास्वामी रेड्डियार, पं- रविशंकर शुक्ला, हरेकृष्ण मेहताब, एस के पाटिल, कमलादेवी चटोपाध्याय, अरुणा आसफ अली, राम मनोहर लोहिया, अशोक मेहता, आर आर दिवाकर और भीमसेन सच्चर उपस्थित थे।श्रमिक नेताओं में प्रमुख गुलजारी लाल नन्दा, खण्डू भाई देसाई, सुरेशचन्द्र बनर्जी, अरविंद अली, जफर भाई, माइकल जॉन, देवेन सेन, हरिहरनाथ शास्त्री, एस आर वसावडा, ए पी सेन, आर के खडिगीकर, जी एस मापारा, जी डीअम्बेकर, जी रामानुजम एवं व्ही- व्ही- द्रविड़।

नई दिल्ली स्थित कॉस्टीट्यूशनल क्लब में 3 मई 1947 को शांय 3 बजे(शनिवार) को सभी ने उपस्थित होकर इस दृढ़ संकल्प को लेकर निर्णय लिया कि एक नया श्रमिक संगठन बनाया जाय जो श्रमिकों की वास्तविक मांगों और उनकी आकांक्षाओं को पूरे देश के सम्मुख रख सके तथा इस कार्य में राष्ट्रीय हित को प्रमुखता दे। ऐसे केन्द्र बनाए जाएं जो श्रमिकों की उचित मांगों को उजागर करे और राष्ट्रीय हितों का भी ख्याल रखे। इस सभा में आए श्रमिक संगठनों की संख्य 200 थी जिनकी सदस्यता 56,500 से ऊपर थी। करीब सभी व्यवसाय, उद्योग एवं विभिन्न सेवाओं से संबंधित श्रमिक संगठनाें के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में उपस्थित थे। सभी प्रदेश की कांग्रेस कमेटियों ने अपने प्रतिनिधियों को इस सम्मेलन में लाग लेने के लिए भेजा था। हर प्रदेश की कांग्रेस कमेटी श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली उपसमितियों की उपस्थिति इस सम्मेलन की विशेषता थी। अखिल भारतीय कांगेस कमेटी के मंत्री एवं हिन्दुसतान मजदूर सेवक संघ के मंत्री की सूचनाओं पर उपरोक्त सभी लोग इस सम्मेलन में उपस्थित हुए थे। आचार्य कृपलानी ने जो उस समय भारतीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे ने इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए संगठन को साधुवाद दिया।

आचार्य कृपलानी ने कहा कि यह बड़ा सुखद प्रारंभ है। हमारे श्रमिक वर्ग के लिए प्रशिक्षित एवं भरोसेमंद श्रमिक नेता इस नये संगठन को स्वस्थ्य परम्पराओं पर चलाने का शुभारम्भ करे रहे हैं। इस अवसर पर गुलजारीलाल नन्दा ने कहा कि यह यंगठन एक ऐसे मंच का निर्माण करेगा जिससे व्यापक एकता कायम होगी और श्रमिकों का कार्य एवं उनका आंदोलन सुचारू रूप से चल सकेगा। डॉ सुरेशचन्द्र बनर्जी ने प्रस्ताव रखा कि हम नये संगठन की स्थापना करने जा रहे हैं जिसका नाम ‘इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ होगा। माइकल जॉन ने प्रस्ताव का समर्थन किया एवं सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।

इस प्रकार 3 मई 1947 को इंटक का ऐतिहासिकआवश्यकता के रूप में जन्मी भारत के स्वाधीन होने के ठीक 3 महीने पूर्व इस सम्मेलन को पं- जवाहरलाल नेहरू ने भी सम्बोधित किया। महात्मा गॉंधी ने जो उस समय दिल्ली में थे, इस श्रम संगठन को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। यह संगठन तबसे लगातार  श्रमिकों के बहुमुखी विचार के लिए कार्य कर रहा है एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का अंग है एवं कांग्रेस इसकी जन्मदाता है। कांग्रेस ने ही इसकी स्थापना की है। इंटक ने राजनीति में कांग्रेस को अपना माध्यम माना है”

इंटक से जुड़े एक अन्य नेता शर्मा बताते हैं की इंटक की कार्यप्रणाली व नीतियों में गांधी दर्शन की झलक है। गांधी जी ने जो रास्ता श्रमिकों की बेहतरी के लिए दिखाया था इंटक उसका अनुसरण करती है। इंटक जहां श्रमिक की उन्नति के लिए कार्य करता है वहीं दूसरी ओर जिन संस्थानो में इंटक के संगठन है उन संस्थानों की प्रगति के लिए भी प्रयास किया जाता है। क्योंकि संस्थान, इंडस्ट्री समृद्ध होंगे तो उसका सीधा लाभ वर्कर को भी मिलेगा।

इंटक की सोच, विचारधारा सृजनात्मक है इंडस्ट्री के हित में है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन संस्थानों में इंटक की यूनियन मजबूत है व वर्कर्स को अच्छे लाभ मिल रहे हैं। अभी हाल ही में इंटक के अध्यक्ष डॉ. जी संजीवा रेड्डी ने भी कहा था प्रबंधन से कोई भी मसला बातचीत के रास्ते हल किया जा सकता है उसके लिए आपके पास ठोस तर्क होना आवश्यक है। यह दर्शाता है कि बदलते परिवेश में ट्रेड यूनियन सकारात्मक भूमिका निभा रही है।इंटक के कार्यकर्ता 3 मई को संगठन दिवस मानते हैं

 

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